ज़िंदगी की शाम तले उम्र का सूरज ढ़ले, तमस घिरी रात की भोर अभी बाकी है। ज़िंदगी की शाम तले उम्र का सूरज ढ़ले, तमस घिरी रात की भोर अभी बाकी है।
ये तो शून्य के जन्म की पटकथा मात्र थी जिसकी रिक्तता मुझे आज तक अंदर ही अंदर खाए जाती है और शायद तुम्... ये तो शून्य के जन्म की पटकथा मात्र थी जिसकी रिक्तता मुझे आज तक अंदर ही अंदर खाए ...
यह आत्मकथा बड़ी मज़ेदार थी इसलिए वह मुस्करा दिया। यह आत्मकथा बड़ी मज़ेदार थी इसलिए वह मुस्करा दिया।
उसकी गीली आँखों को बेटा अपने नन्हें हाथों से पोंछ रहा था बादलों के उस पार से माँ का प्यार सीढ़ी बन उ... उसकी गीली आँखों को बेटा अपने नन्हें हाथों से पोंछ रहा था बादलों के उस पार से माँ...
आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं कल फिर "मेरी संगिनी। आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं कल फिर "मेरी संगिनी।
प्रैक्टिकल हो जाइये भाईसाहब, इसी से संसार चल रहा है। संवेदनाओ के तार- तार होते दिखाई दे रहे है। प्रैक्टिकल हो जाइये भाईसाहब, इसी से संसार चल रहा है। संवेदनाओ के तार- तार होते द...